TKS Ephemeris · janma-kuṇḍalī

Jyotiṣa — rāśi · bhāva-cālita · ṣoḍaśa-varga

जन्म-कुण्डली तीन स्तरों में, उत्तरभारतीय शैली में: राशि (D1), श्रीपति भाव-चालित सन्धि-कुण्डली, और षोडशवर्ग की सोलह वर्ग-कुण्डलियाँ (D1…D60)। स्रोत: नौ ग्रह तथा लग्न/मध्यम-लग्न — सब शुद्ध TKS (DE-kernel दृश्य-स्थिति, स्वयं का GAST + सत्य तिर्यक्, स्वयं का true Chitrāpakṣa)। कोई स्विस/लाहिरी/सूर्यसिद्धान्त नहीं। कुण्डली-ज्यामिति पञ्चाङ्ग-पृष्ठ जैसी (jyotichart)।

जन्म-विवरण

जातक विवरण · अवकहड़ा (जन्मपत्री प्रारम्भ)

…

…

राशि · भाव-चालित (श्रीपति) · ग्रह

राशि कुण्डली — D1

उत्तरभारतीय · पूर्ण-राशि भाव

…

भाव-चालित — श्रीपति भाव-सन्धि

भाव-सन्धि

…

राशि-भाव और चालित-भाव

पूर्ण-राशि भाव से भिन्न हो तो «चलित»

…

ग्रह-स्फुट — अवस्था · गरिमा · दशवर्गभेद (BPHS ४५)

…

षोडशवर्ग — सोलह वर्ग-कुण्डलियाँ (उत्तरभारतीय)

D1 राशि · D2 होरा · D3 द्रेष्काण · D4 चतुर्थांश · D7 सप्तांश · D9 नवांश · D10 दशांश · D12 द्वादशांश · D16 षोडशांश · D20 विंशांश · D24 चतुर्विंशांश · D27 भांश (नक्षत्रांश) · D30 त्रिंशांश · D40 खवेदांश · D45 अक्षवेदांश · D60 षष्ट्यांश — प्रत्येक में पूर्ण ग्रह-स्फुट (वर्ग-राशि · अंश · नक्षत्र/पाद · भाव)। प्रतिचित्रण BPHS अध्याय ६ के अनुसार (नीचे टिप्पणी देखें)।

…

वर्ग-तुलना — प्रत्येक वर्ग में प्रत्येक ग्रह

…

अष्टकवर्ग — भिन्न · सर्व · शोध्य-पिण्ड (BPHS)

…

पञ्चधा मैत्री चक्र — नैसर्गिक + तात्कालिक

…

षड्बल · बल · भाव-फल — BPHS

षड्बल — षड्विध बल

विरूप · रूप

…

बल-पटल

…

…

भाव-फल — भाव-बल एवं फल

…

…

वर्ग-बल — हर्ष · पञ्चवर्गीय · विंशोपक · भाव-बल

बल-सारणियाँ

…

जैमिनी — आरूढ़ · चरकारक · अर्गला · योगी

आरूढ़ पद · चरकारक · योगी/अवयोगी स्फुट

…

…

दोष — गण्डमूल · श्रापित · गुरु-चाण्डाल · पितृ-शाप

…

…

राज-योग — धर्म-कर्माधिपति · विपरीत · नीचभङ्ग

…

…

नाभस-योग (३२) — आकृति · संख्य · आश्रय · दल

…

…

योग-समूह — पञ्चमहापुरुष · चन्द्र · अन्य

…

…

उपग्रह कुण्डली — BPHS अध्याय ३

उपग्रह कुण्डली

…

…

उपग्रह स्फुट

ग्यारह उपग्रह

…

विंशोत्तरी दशा — महा · अन्तर · प्रत्यन्तर

चलमान दशा

दृक्

…

महादशा-सारणी

१२०-वर्षीय चक्र · नौ स्वामी

…

अन्तर्दशा

…

…

प्रत्यन्तर दशा

…

…

योगिनी दशा — महा · अन्तर

चलमान योगिनी दशा

…

…

योगिनी महादशा-सारणी

आठ योगिनी · चक्र

…

योगिनी अन्तर्दशा

…

…

कालचक्र दशा

कालचक्र दशा — महादशा · अन्तर्दशा

…

…

गोचर एवं साढ़े-साती

गोचर — वर्तमान ग्रह-स्थिति

…

…

अष्टोत्तरी दशा — १०८ वर्ष

अष्टोत्तरी — महादशा

…

…

अष्टोत्तरी — अन्तर्दशा

…

…

जैमिनि राशि-दशाएँ — चर व नारायण

जैमिनि चर-दशा — महादशा

…

…

चर-दशा — अन्तर्दशा

…

…

नारायण दशा — महादशा (दो चक्र)

…

…

नारायण दशा — अन्तर्दशा

…

…

सुदर्शन चक्र — वार्षिक

वार्षिक सुदर्शन कुण्डली एवं दशा

…

…

विधि एवं सत्यापन

TKS स्रोत · BPHS अध्याय ६ प्रतिचित्रण · श्रीपति भाव-सन्धि · सत्यापन-तुलना
स्रोत। नौ ग्रह TKS इंजन की अपनी DE-कर्नल स्पष्ट स्थितियाँ, सत्य चित्रापक्ष में हैं (?engine=tks से अनुरोधित); राहु/केतु चन्द्र के सत्य नोड हैं। लग्न व मध्यम-लग्न TKS इंजन की ही GAST (GMST + विषुव-संस्कार) एवं सत्य अक्ष-झुकाव से, उसी सत्य चित्रापक्ष से घटाकर निकाले गए — स्विस नहीं, लाहिड़ी नहीं, सूर्यसिद्धान्त (मूल) नहीं (डिफ़ॉल्ट इंजन मूल होता)। स्विस सायन लग्न से स्वतन्त्र सत्यापित (ज्यामिति ~1e-6° तक); शेष ~0.0037° का अन्तर TKS-हिप्पार्कस चित्रापक्ष व स्विस SIDM_TRUE_CITRA अयनांश-मॉडल का है।
विंशोत्तरी दशा। महा/अन्तर/प्रत्यन्तर चन्द्र-नक्षत्र से; शून्य से की गई शास्त्रीय गणना से सत्यापित (scripts/dasha_oracle_compare.py) — १३/१३ (जन्म-शेष, प्रत्येक महा-सन्धि व अवधि, १२०-वर्षीय चक्र, तथा चलमान महादशा की पूरी अन्तर्दशा सारणी)।
उपग्रह। पाँच सूर्यजनित (BPHS ३.६१–६२ के अन्तर) तथा छह कालवेला (वार-क्रम आठ-भाग नियम); प्रत्येक कालवेला का देशान्तर अपनी सन्धि पर स्विस-स्पष्ट लग्न के बराबर 0.0002° तक (scripts/upagraha_oracle_compare.py) — सब उत्तीर्ण।
वर्ग-प्रतिचित्रण। सीधे बृहत् पाराशर होरा शास्त्र, अध्याय ६ के मुद्रित स्फुट-पाठ से (आर. सन्थानम अनुवाद): D2 होरा — «विषम राशि का पूर्वार्ध … सूर्य (सिंह), उत्तरार्ध … चन्द्र (कर्क); सम राशि में विपरीत»; D3 राशि/५/९; D4 राशि/४/७/१०; D7 «विषम राशि से, सम सप्तम से»; D9 चर राशि से, स्थिर नवम से, द्विस्वभाव पञ्चम से; D10 विषम राशि से, सम नवम से; D12 राशि से चक्रानुसार; D16 चर→मेष, स्थिर→सिंह, द्विस्वभाव→धनु; D20 चर→मेष, स्थिर→धनु, द्विस्वभाव→सिंह; D24 विषम→सिंह, सम→कर्क; D27 अग्नि→मेष, पृथ्वी→कर्क, वायु→तुला, जल→मकर; D30 विषम ५·५·८·७·५ → मेष, कुम्भ, धनु, मिथुन, तुला तथा सम ५·७·८·५·५ → वृषभ, कन्या, मीन, मकर, वृश्चिक; D40 विषम मेष से, सम तुला से; D45 «मेष, सिंह एवं धनु … चर, स्थिर तथा द्विस्वभाव हेतु»; D60 «राशि-स्थिति छोड़कर … अंशों को २ से गुणा … शेष में १ जोड़ें»: मेष से एक चक्रानुसार गणना।
सत्यापन। प्रत्येक वर्ग सम्पूर्ण राशिचक्र पर (२४,७६८ देशान्तर, प्रत्येक सन्धि सहित ±1e-7°, ±1e-5°) तीन स्वतन्त्र स्रोतों से जाँचा गया: स्वयं BPHS पाठ (scripts/bphs_varga_rules.py), तन्त्रकुल मुद्रक-पाठ तथा स्वतन्त्र गणना (scripts/varga_oracle_compare.py, रिपोर्ट data/varga_oracle_report.txt)। तुलना में तीन वास्तविक दोष पकड़े गए — D30 की सम-राशि चौड़ाई, तथा D45 व D60 के आरम्भ — जो अब ठीक हैं; D30 व D60 स्वतन्त्र गणना से, D45 पाठ से पुष्ट।
भाव-चालित। श्रीपति भाव-सन्धि: लग्न→दशम (RAMC) चाप तथा उसका विपरीत त्रिभाजित होते हैं, अतः प्रत्येक भाव केवल अपने चतुर्थांश में सम होता है; दशम मध्यम लग्न है, राशि-दशम नहीं। ग्रह उस भाव में रखे जाते हैं जिसकी सन्धि-से-सन्धि चाप उन्हें समाती है; ऊपर «राशि-भाव» तुलना हेतु D1 का पूर्ण-राशि भाव है। न प्लासिडस, न पूर्ण-राशि।
कुण्डलियाँ। उत्तरभारतीय कुण्डली, पञ्चाङ्ग पृष्ठ के ही बहुभुज व लेबल-स्थानों के साथ (ज्यामिति jyotichart से): बारह कोष्ठ बारह भाव हैं, कोष्ठ १ लग्न है, तथा कोष्ठ में छपी संख्या राशि-संख्या है (चालित कुण्डली में भाव-संख्या)। scripts/check_kundali_geometry.mjs दोनों प्रतियाँ समान रखता है।
संस्करणः bin-1790843185